|
कर्मफल नही स्पर्मफल संडे टाइम्स
कर्मफल नही स्पर्मफल
संडे टाइम्स (22 अप्रैल, 2012 संडे) के पहले पेज पर खबर है कि इंसानों में स्पर्म्स की संख्या कम होती जा रही है। इतनी कम हो रही है कि निकट भविष्य में बच्चों को जन्म देना मुश्किल होगा।
यानी स्पर्म बैंक का सहारा लेना होगा, तब अगली पीढ़ी आएगी। स्पर्म्स हो सकता है कि साइंटिफिकली इतने विकसित हो जाएं कि डॉक्टर के स्पर्म से विकसित बच्चे खुद-ब-खुद डॉक्टरी ज्ञान से लैस होकर डाक्टर बन जाएं। इंजीनियर बन जाएं। यानी बच्चे कर्मफल से नहीं, स्पर्मफल से मिलेंगे जी। फूड कॉरपोरेशन की तर्ज पर स्पर्म्स कॉरपोरेशन बनेगा। कुल मिलाकर सरकारी काम होगा साहब। कुछ भी हो सकता है। कई सालों बाद कुछेक सीन इस तरह के होंगे :
हिमालय पर युद्ध होने को है। एक सैनिक खड़ा होकर लेक्चर दे रहा है - राष्ट्रहित के लिए हम खून बहा देंगे, जान दे देंगे।
पीछे से उसका कमांडिंग अफसर कह रहा है, अबे गोली चला।
सैनिक चीखे जा रहा है, यहां पुल बनवा दूंगा। एयरपोर्ट बना दूंगा। मेट्रो यहां ले आऊंगा। ओवर ब्रिज, अंडरपास सब बनवा दूंगा।
अबे, हिमालय पे ओवरब्रिज बनाएगा, कमांडिंग अफसर सिर पीट रहा है। सैनिक वापस निकल लिया है।
कमांडिंग अफसर किसी को बता रहा है- यह दिल्ली के किसी नेता के स्पर्म से डिवेलप हुआ सैनिक है। अब ये पांच साल बाद ही दोबारा यहां आएगा।
एक सीन ये भी हो सकता है कि अस्पतालों में डॉक्टर ऑपरेशन रूम में घुसे , सामने पेशंट पड़ा हो और डॉक्टर घुसते ही नृत्य शुरू कर दे - तग धीधी धिंधा। धग धग।
पूछने पर बताया जाएगा - यह बहुप्रतिभाशाली बंदे के स्पर्म से विकसित डॉक्टर है। स्पर्म जिसका था , वह कत्थक डांसर था , और डॉक्टर भी था। इस स्पर्म से यह बड़ा हुआ है , तो यह पहले ढाई घंटे कत्थक करता है , फिर ऑपरेशन शुरू करता है। ठीक है कि हार्ट का ऑपरेशन है पेशेंट का , पर आप इस डांस को हार्ट पे ना लें।
किसी मनोचिकित्सक के पास इस तरह का केस आएगा - जी यह जो घर के मालिक हैं। यूं तो हलवाई हैं , पर जो भी दुकान पर आता है बरफी - कचौड़ी खरीदने उससे कहते हैं कि आईडी प्रूफ दिखा , पैन कार्ड दिखा , वोटर कार्ड दिखा। तब मिलेगी कचौड़ी। यह रोज रात में करीब 12 बजे घर में हर सोए हुए बंदे को उठाते हैं और कहते हैं कि टिकट दिखाए आईडी प्रूफ दिखाया। फिर किसी एक का पैन कार्ड देखकर हड़काते हैं कि यह फोटो तो आपका है ही नहीं , कोने में आइए। और जी उससे 500 रुपये ले लेते हैं , जब जाकर सोते हैं और सबको सोने देते हैं।
मनोचिकित्सक बता रहे हैं कि इनका कुछ ना हो सकता है , जिस स्पर्म से यह डिवेलप हुए हैं , वह किसी सीनियर रेलवे टीटीई का है।
साहब जी , कर्मफल ही सब कुछ ना होता , कुछ स्पर्मफल भी होगा ।
|