tantric_yogi
November 22nd, 2009, 12:42 AM
जेठमलानी ने लगाई आग, मोइली ने डाला पानी
Nov 21, 09:44 pm
http://l.yimg.com/t/news/jagran/20091121/16/ramjethmal_fix-1_1258820710_m.jpg
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। आतंकवाद पर कानूनविदों के सम्मेलन में शनिवार को पूर्व कानून मंत्री व प्रख्यात वकील राम जेठमलानी की टिप्पणी से बवाल मच गया। उन्होंने आतंकवाद के लिए वहाबी समुदाय पर सीधे अंगुली उठाई और यह भी कहा कि आतंकवाद के लिए इस्लाम को बदनाम किया जाता है, जबकि हिंदू और बौद्ध आतंकी भी मौजूद हैं।
जेठमलानी की टिप्पणी का अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के एक जज और सऊदी अरब के राजदूत ने कड़ा विरोध किया। जज ने जहां जेठमलानी को जवाब देकर अपना विरोध जताया, वहीं राजूदत ने तो सम्मेलन का बहिष्कार ही कर दिया। कानून मंत्री को अपनी ओर से सफाई देकर मामला ठंडा करना पड़ा।
सम्मेलन में मुख्य न्यायाधीश ने आतंकवाद पर मीडिया कवरेज को लेकर चिंता जताई। दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद की रोकथाम के लिए ठोस कानून की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आतंकियों की फंडिंग, उनके नेटवर्क और ड्रग्स की तस्करी पर प्रहार कर उनकी रीढ़ तोड़नी होगी। इसके लिए पूरे विश्व को एकजुट होना पड़ेगा।
सभी वक्ता इस बात से सहमत थे कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट होना चाहिए। लेकिन जेठमलानी की एक टिप्पणी पर सहमति की यह दीवार ढह गई। अखिल भारतीय वरिष्ठ अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष की हैसियत से बोलते हुए जेठमलानी ने आतंकवाद फैलाने के लिए सीधे-सीधे वहाबी समुदाय पर अंगुली उठा दी।
जेठमलानी बोले कि वहाब आतंकवाद युवाओं के दिमाग में जहर घोल रहा है और वे आतंकवाद की ओर प्रेरित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो देश 'वहाब आतंकवाद' को बढ़ावा दे रहे हैं, भारत उनके साथ दोस्ती निभा रहा है। जेठमलानी यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, 'दुर्भाग्य है कि आतंकवाद के लिए इस्लाम को बदनाम किया जा रहा है, जबकि यहां हिंदू और बौद्ध आतंकवाद भी है।'
जेठमलानी की इस टिप्पणी पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के जज अवान एस. अल-खासवनेह ने फौरन आपत्ति जताई और उन्हें टोका। उन्होंने उन्हें इस तरह सीधा आरोप लगाने से मना किया। भारत में सऊदी अरब के राजदूत फैसल अल त्राद तो विरोधस्वरूप सम्मेलन कक्ष से बाहर चले गए। कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने मौका मिलते ही सफाई दी कि भारत आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ कर नहीं देखता है। उन्होंने जेठमलानी की टिप्पणी को उनके निजी विचार बता कर मामले को शांत करने की कोशिश की। इसके बाद राजदूत सम्मेलन में दोबारा लौट आए।
इससे पहले राष्ट्रपति ने न्यायविदों से कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में आतंकवाद विश्व समुदाय के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून का एक ढांचा भी तैयार करना होगा ताकि आतंकियों को घेरा जा सके। गौरतलब है कि भारत की ओर से लगातार सबूत देने के बावजूद पाकिस्तान में कुछ वांछित आतंकी शरण लिए बैठे हैं। जाहिर तौर पर राष्ट्रपति का इशारा उनकी ओर था।
मुख्य न्यायाधीश ने भी आतंकवाद को किसी खास नस्ल या समुदाय से न जोड़ने की अपील करते हुए मीडिया से भी जिम्मेदार होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आतंकी हमलों के व्यापक मीडिया कवरेज से आम लोगों के दिमाग पर खराब असर पड़ता है। वैश्विक स्तर पर एकजुटता की बात करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकियों के प्रत्यर्पण और जांच संबंधी मामलों के लिए व्यापक सहमति का आधार बनाना होगा।
मोइली सरकार की पीठ थपथपाते और जेठमलानी की टिप्पणियों पर जवाब देते ज्यादा नजर आए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की जटिलताओं को देखते हुए सरकार ने हाल में राष्ट्रीय जांच एजेंसी बनाई है। भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मानता रहा है। यही कारण है कि आतंकवाद का सबसे ज्यादा शिकार होने के बावजूद भारत शांति और विकास की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने जेठमलानी की उस टिप्पणी को भी खारिज किया कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन और पंचशील अप्रभावी हैं। जेठमलानी ने सरकार को सुझाव दिया था कि पुराने सिद्धांतों की समीक्षा करे और 'दुश्मनों के साथ संबंधों की नई परिभाषा गढ़े।' मोइली ने साफ किया कि गुटनिरपेक्षता के प्रति सरकार की सोच नहीं बदली है।
Link ... (http://in.jagran.yahoo.com/news/national/politics/5_2_5960206.html)
Nov 21, 09:44 pm
http://l.yimg.com/t/news/jagran/20091121/16/ramjethmal_fix-1_1258820710_m.jpg
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। आतंकवाद पर कानूनविदों के सम्मेलन में शनिवार को पूर्व कानून मंत्री व प्रख्यात वकील राम जेठमलानी की टिप्पणी से बवाल मच गया। उन्होंने आतंकवाद के लिए वहाबी समुदाय पर सीधे अंगुली उठाई और यह भी कहा कि आतंकवाद के लिए इस्लाम को बदनाम किया जाता है, जबकि हिंदू और बौद्ध आतंकी भी मौजूद हैं।
जेठमलानी की टिप्पणी का अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के एक जज और सऊदी अरब के राजदूत ने कड़ा विरोध किया। जज ने जहां जेठमलानी को जवाब देकर अपना विरोध जताया, वहीं राजूदत ने तो सम्मेलन का बहिष्कार ही कर दिया। कानून मंत्री को अपनी ओर से सफाई देकर मामला ठंडा करना पड़ा।
सम्मेलन में मुख्य न्यायाधीश ने आतंकवाद पर मीडिया कवरेज को लेकर चिंता जताई। दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद की रोकथाम के लिए ठोस कानून की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आतंकियों की फंडिंग, उनके नेटवर्क और ड्रग्स की तस्करी पर प्रहार कर उनकी रीढ़ तोड़नी होगी। इसके लिए पूरे विश्व को एकजुट होना पड़ेगा।
सभी वक्ता इस बात से सहमत थे कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट होना चाहिए। लेकिन जेठमलानी की एक टिप्पणी पर सहमति की यह दीवार ढह गई। अखिल भारतीय वरिष्ठ अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष की हैसियत से बोलते हुए जेठमलानी ने आतंकवाद फैलाने के लिए सीधे-सीधे वहाबी समुदाय पर अंगुली उठा दी।
जेठमलानी बोले कि वहाब आतंकवाद युवाओं के दिमाग में जहर घोल रहा है और वे आतंकवाद की ओर प्रेरित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो देश 'वहाब आतंकवाद' को बढ़ावा दे रहे हैं, भारत उनके साथ दोस्ती निभा रहा है। जेठमलानी यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, 'दुर्भाग्य है कि आतंकवाद के लिए इस्लाम को बदनाम किया जा रहा है, जबकि यहां हिंदू और बौद्ध आतंकवाद भी है।'
जेठमलानी की इस टिप्पणी पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के जज अवान एस. अल-खासवनेह ने फौरन आपत्ति जताई और उन्हें टोका। उन्होंने उन्हें इस तरह सीधा आरोप लगाने से मना किया। भारत में सऊदी अरब के राजदूत फैसल अल त्राद तो विरोधस्वरूप सम्मेलन कक्ष से बाहर चले गए। कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने मौका मिलते ही सफाई दी कि भारत आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ कर नहीं देखता है। उन्होंने जेठमलानी की टिप्पणी को उनके निजी विचार बता कर मामले को शांत करने की कोशिश की। इसके बाद राजदूत सम्मेलन में दोबारा लौट आए।
इससे पहले राष्ट्रपति ने न्यायविदों से कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में आतंकवाद विश्व समुदाय के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून का एक ढांचा भी तैयार करना होगा ताकि आतंकियों को घेरा जा सके। गौरतलब है कि भारत की ओर से लगातार सबूत देने के बावजूद पाकिस्तान में कुछ वांछित आतंकी शरण लिए बैठे हैं। जाहिर तौर पर राष्ट्रपति का इशारा उनकी ओर था।
मुख्य न्यायाधीश ने भी आतंकवाद को किसी खास नस्ल या समुदाय से न जोड़ने की अपील करते हुए मीडिया से भी जिम्मेदार होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आतंकी हमलों के व्यापक मीडिया कवरेज से आम लोगों के दिमाग पर खराब असर पड़ता है। वैश्विक स्तर पर एकजुटता की बात करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकियों के प्रत्यर्पण और जांच संबंधी मामलों के लिए व्यापक सहमति का आधार बनाना होगा।
मोइली सरकार की पीठ थपथपाते और जेठमलानी की टिप्पणियों पर जवाब देते ज्यादा नजर आए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की जटिलताओं को देखते हुए सरकार ने हाल में राष्ट्रीय जांच एजेंसी बनाई है। भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मानता रहा है। यही कारण है कि आतंकवाद का सबसे ज्यादा शिकार होने के बावजूद भारत शांति और विकास की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने जेठमलानी की उस टिप्पणी को भी खारिज किया कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन और पंचशील अप्रभावी हैं। जेठमलानी ने सरकार को सुझाव दिया था कि पुराने सिद्धांतों की समीक्षा करे और 'दुश्मनों के साथ संबंधों की नई परिभाषा गढ़े।' मोइली ने साफ किया कि गुटनिरपेक्षता के प्रति सरकार की सोच नहीं बदली है।
Link ... (http://in.jagran.yahoo.com/news/national/politics/5_2_5960206.html)