Kavyadhara Team
August 9th, 2009, 12:16 AM
तेरी हर बात पर हम ऐतबार करते रहे
तुम हमें छलते रहे और हम प्यार करते रहे ।
कोशिशें करते तो मंजिले शायद मिल जाती
मगर अफ़सोस तुम वादे हज़ार करते रहे ।
नाम तक मेरा उन्हें याद भी नहीं आया
अपनों मे जिनको हम शुमार करते रहे ।
मुझको मालूम था तुम नहीं आओगे फिर भी
एक उम्मीद सी लिए इन्तिज़ार करते रहे ।
ज़िन्दगी यूँ तो गुज़र रही है पहले की तरह
पर पिछले घाव कुछ जीना दुश्वार करते रहे ।
याद आते ही तुम्हारी सीने के समंदर से
नयन भर भर के अश्कों की बौछार करते रहे ।
एक घर में कहकहे और शहनाई की आवाज़
'दीपक' अरमान मेरा तार - तार करते रहे
Ghazal taken from Poet's website
http://www.kavideepaksharma.co.in (http://www.kavideepaksharma.co.in)
तुम हमें छलते रहे और हम प्यार करते रहे ।
कोशिशें करते तो मंजिले शायद मिल जाती
मगर अफ़सोस तुम वादे हज़ार करते रहे ।
नाम तक मेरा उन्हें याद भी नहीं आया
अपनों मे जिनको हम शुमार करते रहे ।
मुझको मालूम था तुम नहीं आओगे फिर भी
एक उम्मीद सी लिए इन्तिज़ार करते रहे ।
ज़िन्दगी यूँ तो गुज़र रही है पहले की तरह
पर पिछले घाव कुछ जीना दुश्वार करते रहे ।
याद आते ही तुम्हारी सीने के समंदर से
नयन भर भर के अश्कों की बौछार करते रहे ।
एक घर में कहकहे और शहनाई की आवाज़
'दीपक' अरमान मेरा तार - तार करते रहे
Ghazal taken from Poet's website
http://www.kavideepaksharma.co.in (http://www.kavideepaksharma.co.in)