clik
November 25th, 2008, 09:02 PM
छोड़ बाप का डनलप गद्दा इस खटिया पर सो जा,
दाग गरीबी की चादर के आकर सारे धो जा,
टूटा-सा है जूता मेरा फटा हुआ है मौजा,
फिर भी दिल दीवाना कहता बस तू मेरी हो जा,
तू रखना उपवास प्रेम से रोजा में रख लूंगा,
हूं मुंगेरी लाल मेरे सपनों में आ के खो जा,
सरकारी नल-सी आंखों को आकर आज भिगो जा,
मेरी टूटी हुई सुई में धागा कोई पिरो जा,
मन के इस सूखे गमले में इश्क की फसलें बो जा,
ढूंढ ही लेगी तू भी मुझको जैसे मैंने खो जा,
लावारिस उजड़ी मजार पर एक शाम तो रो जा,
डूध समझकर तू मथनी से मेरा कफन बिलो जा,
नागफनी-सी पलकें तेरी आंखें हैं चिलगोजा,
"Clik" के पथराए दिल में जो मन करे चुभो जा।
दाग गरीबी की चादर के आकर सारे धो जा,
टूटा-सा है जूता मेरा फटा हुआ है मौजा,
फिर भी दिल दीवाना कहता बस तू मेरी हो जा,
तू रखना उपवास प्रेम से रोजा में रख लूंगा,
हूं मुंगेरी लाल मेरे सपनों में आ के खो जा,
सरकारी नल-सी आंखों को आकर आज भिगो जा,
मेरी टूटी हुई सुई में धागा कोई पिरो जा,
मन के इस सूखे गमले में इश्क की फसलें बो जा,
ढूंढ ही लेगी तू भी मुझको जैसे मैंने खो जा,
लावारिस उजड़ी मजार पर एक शाम तो रो जा,
डूध समझकर तू मथनी से मेरा कफन बिलो जा,
नागफनी-सी पलकें तेरी आंखें हैं चिलगोजा,
"Clik" के पथराए दिल में जो मन करे चुभो जा।