alok
November 24th, 2005, 05:11 AM
अक्सर भूल जाता हूँ कि जियोसिटीज़ पर भी कई बढ़िया स्थल होते हैं। आखिर मेरा स्थल भी पहले वहीं तो था। तो आज एक मिला है - जो कि आप लोगों को बताना चाहता हूँ - तिरुक्कुरळ हिन्दी में (http://www.geocities.com/ashrafnvk/kur-hind/Hin092.htm) ।
इसमें से कुछ -
चाह नहीं है प्रेमवश, धनमूलक है चाह ।
ऐसी स्त्री का मधुर वच, ले लेता है आह ॥
दया और प्रिय भाव से, प्राप्त नहीं जो वित्त ।
जाने दो उस लाभ को, जमे न उसपर चित्त ॥
केवल तमिळ से अनुवाद ही नहीं, काव्य शैली में अनुवाद है। काफ़ी मेहनत की होगी। आप भी पढ़ें और इस पर विचार करें।
इसमें से कुछ -
चाह नहीं है प्रेमवश, धनमूलक है चाह ।
ऐसी स्त्री का मधुर वच, ले लेता है आह ॥
दया और प्रिय भाव से, प्राप्त नहीं जो वित्त ।
जाने दो उस लाभ को, जमे न उसपर चित्त ॥
केवल तमिळ से अनुवाद ही नहीं, काव्य शैली में अनुवाद है। काफ़ी मेहनत की होगी। आप भी पढ़ें और इस पर विचार करें।