alok
September 27th, 2005, 02:51 AM
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/1243268.cms
हद होती है मद्रासी लोगों की। उसने तो इतना ही कहा था कि जो करना चाहता है करे।
इसके लिए माफ़ी माँग ली।
यार ये मद्रासी लोग पहले तो ऍमजीआर की रखैल को मुख्यमन्त्री बना देते हैं और फिर उसी बात पर नाराज़ हो जाते हैं।
खुश्बू ने भी अपनी लोकप्रियता बनाए रखने के लिए ही रो धो के माफ़ी माँग ली।
मतलब जो कुछ दिख रहा है उसके सामने आँखें बन्द कर के बैठे रहो, और जो उसके बारे में बोल दे उसको अलग से झाड़ लगा दो।
पर उस सबसे भी पहली बात - अग़र कोई किसी बात पर अपना विचार - अपना निजी विचार - व्यक्त करता है - तो उसके लिए माफ़ी माँगने की ज़रूरत क्या है?
आपका क्या विचार है?
हद होती है मद्रासी लोगों की। उसने तो इतना ही कहा था कि जो करना चाहता है करे।
इसके लिए माफ़ी माँग ली।
यार ये मद्रासी लोग पहले तो ऍमजीआर की रखैल को मुख्यमन्त्री बना देते हैं और फिर उसी बात पर नाराज़ हो जाते हैं।
खुश्बू ने भी अपनी लोकप्रियता बनाए रखने के लिए ही रो धो के माफ़ी माँग ली।
मतलब जो कुछ दिख रहा है उसके सामने आँखें बन्द कर के बैठे रहो, और जो उसके बारे में बोल दे उसको अलग से झाड़ लगा दो।
पर उस सबसे भी पहली बात - अग़र कोई किसी बात पर अपना विचार - अपना निजी विचार - व्यक्त करता है - तो उसके लिए माफ़ी माँगने की ज़रूरत क्या है?
आपका क्या विचार है?